डिंपल यादव पर मौलाना की अभद्र टिप्पणी पर भड़के फारूक कादरी, कहा— महिला अपमान बर्दाश्त नहीं”

“डिंपल यादव पर मौलाना की अभद्र टिप्पणी पर भड़के फारूक कादरी, कहा— महिला अपमान बर्दाश्त नहीं”
“फारूक कादरी का हमला मणिपुर- बिल्किस पर चुप, अब संसद में दिखावा कर रही भाजपा
पीलीभीत।मौलाना साजिद रशीदी, जो खुद को इस्लामी विद्वान कहते हैं और बीजेपी के समर्थक बताए जा रहे हैं, उन्होंने एक टीवी डिबेट में डिंपल यादव की वेशभूषा और उपस्थिति पर आपत्तिजनक टिप्पणी की।डिंपल यादव और उनके पति अखिलेश यादव कुछ अन्य लोगों के साथ दिल्ली के एक धार्मिक स्थल (मस्जिद) में पहुंचे थे। वहाँ डिंपल यादव साड़ी में थीं और उनका सिर ढका नहीं था। इसी बात पर साजिद रशीदी ने कहा उसकी पीठ देखो गलत टिप्पणी की थी।एक महिला जनप्रतिनिधि, सबसे बड़ी पंचायत की सदस्य पर ऐसी टिप्पणी करना बेहद शर्मनाक बात है।संसद देश की सबसे बड़ी लोकतांत्रिक संस्था है, और एक निर्वाचित महिला सांसद पर ऐसी टिप्पणी लोकतंत्र और स्त्री गरिमा का सीधा अपमान है।ऐसे लोगों पर कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए। इनका सामाजिक बहिष्कार होना चाहि।यह स्पष्ट मांग है कि कानूनी और सामाजिक स्तर पर सख्त कदम उठाए जाएं। सिर्फ माफी या बयानबाजी काफी नहीं।ये कोई धर्मगुरु नहीं हैं, किसी धर्म के ठेकेदार नहीं हैं। इन्हें किसी भी महिला पर ऐसी टिप्पणी करने का कोई अधिकार नहीं है।फारूक कादरी ने साफ कहा कि इस्लाम या किसी भी धर्म में स्त्री अपमान की अनुमति नहीं है। ऐसे मौलवियों को धर्म के ठेकेदार बनकर बोलने का कोई हक नहीं।यह भी दिखाता है कि भाजपा महिला सम्मान के मुद्दे पर कितनी दोहरी नीति अपनाती है।उन्होंने सीधे तौर पर बीजेपी को घेरा कि वह महिला सुरक्षा पर सिर्फ राजनीतिक फायदा उठाने के लिए बोलती है, असल मुद्दों (जैसे मणिपुर हिंसा, बिल्किस बानो) पर चुप रहती है।
डिंपल यादव सिर्फ अखिलेश यादव की पत्नी नहीं, एक सशक्त, शिक्षित महिला हैं।यह बहुत महत्वपूर्ण पंक्ति है, जिसमें यह कहा गया है कि डिंपल यादव की पहचान केवल एक नेता की पत्नी के रूप में नहीं होनी चाहिए, बल्कि उन्हें एक स्वतंत्र और योग्य नेता के रूप में देखा जाना चाहिए। फारूक कादरी ने यह बयान देकर विपक्ष को यह संदेश देने की कोशिश की कि डिंपल यादव पर हमले का विरोध करना नई और न्यायपूर्ण राजनीति की दिशा में एक कदम है।




