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धनेगा से उमरा को रवाना हुए जायरीन, गढ़वा खेड़ा में सैकड़ों ग्रामीणों ने दी भावभीनी विदाई

धनेगा से उमरा को रवाना हुए जायरीन, गढ़वा खेड़ा में सैकड़ों ग्रामीणों ने दी भावभीनी विदाई

गोरा, पीलीभीत।थाना सेहरामऊ उत्तरी क्षेत्र के गांव धनेगा से इसामुल्ला खां के नेतृत्व में उमरा यात्रा पर जा रहे जायरीनों का मंगलवार को गांववासियों ने भावभीन विदाई दी।जायरीन गढ़वा खेड़ा से दिल्ली एयरपोर्ट के लिए रवाना हुए,जहां से वे हवाई जहाज द्वारा सऊदी अरब के लिए उड़ान भरेंगे।गांव धनेगा और आस-पास के क्षेत्र से उमरा जाने वालों का उत्साह देखते ही बन रहा था। रवाना होने से पहले जायरीन ने अपने घर पर मिलाद शरीफ का आयोजन किया, जिसमें बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने शिरकत की। कार्यक्रम के बाद अगले दिन जायरीन पवित्र सफर-ए-उमरा पर निकल पड़े।
गढ़वा खेड़ा में जायरीनों की विदाई को लेकर विशेष आयोजन किया गया, जहां सैकड़ों ग्रामीण इकट्ठा हुए। जायरीनों को फूल-मालाएं पहनाई गईं और खाना- ए-काबा शरीफ पहुंच कर देश, समाज, रिश्तेदारों और मित्रों के लिए दुआ करने की अपील की गई।जायरीनों के विदाई के समय “नारा-ए-तकबीर” और “अल्लाहु अकबर” के नारों से वातावरण गुंजायमान हो उठा।इस जत्थे की उमरा यात्रा रज़ा टूर एंड ट्रैवल्स के माध्यम से करवाई जा रही है। हाफिज रिजवान खान ने बताया कि रज़ा टूर हर साल पीलीभीत समेत कई जिलों से सैकड़ों जायरीनों को उमरा यात्रा के लिए ले जाता है। उन्होंने कहा कि यह उनके लिए भी सौभाग्य की बात होती है कि वे ऐसे पवित्र सफर में लोगों की सेवा कर पाते हैं।जानकारी के अनुसार, जहां हज केवल वर्ष में एक बार किया जाता है और उसमें लगभग 45 दिन लगते हैं, वहीं उमरा यात्रा साल भर किसी भी समय की जा सकती है और इसकी अवधि लगभग 21 दिन होती है। उमरा के इस मुकद्दस सफर पर जाने वाले जायरीनों को लेकर गांव में खुशी और गर्व का माहौल रहा।इस अवसर पर आसपास के गांवों से भी हजारों की संख्या में लोग जायरीनों से मिलने, उन्हें विदाई देने और दुआ की दरख्वास्त करने के लिए पहुंचे। यह आयोजन न सिर्फ धार्मिक आस्था का प्रतीक था, बल्कि सामाजिक सौहार्द और भाईचारे की मिसाल भी बना।

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