बारिश ने बिगाड़ी माती माफ़ी में लगने वाले मेले की रंगत, अव्यवस्थाओं से जूझते रहे श्रद्धालु
पानी भरने से कीचड़ में तब्दील हुए रास्ते, आवागमन में श्रद्धालुओं को हुई दिक्क़ते

बारिश ने बिगाड़ी माती माफ़ी में लगने वाले मेले की रंगत, अव्यवस्थाओं से जूझते रहे श्रद्धालु
पानी भरने से कीचड़ में तब्दील हुए रास्ते, आवागमन में श्रद्धालुओं को हुई दिक्क़ते
मेले की आड़ में सिर्फ वसूली, व्यवस्था नदारद; मेला कमेटी पर उठे सवाल
पूरनपुर, पीलीभीत।माती माफ़ी में आयोजित वार्षिक मेले की रंगत इस बार बारिश और अव्यवस्थाओं ने पूरी तरह बिगाड़ दी। पूरे माह चलने वाला मेला अंतिम दिन लगातार बारिश के कारण मेला परिसर कीचड़ में तब्दील हो गया, जिससे श्रद्धालुओं को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा।बारिश से जहां रास्ते फिसलन भरे और जलमग्न हो गए, वहीं कहीं भी जल निकासी की व्यवस्था नजर नहीं आई। शौचालय, पेयजल और प्राथमिक चिकित्सा जैसी मूलभूत सुविधाओं का टोटा देखने को मिला।आस्था का प्रसिद्ध केंद्र माती माफी में जातों का मेला अंतिम दिन बारिश की भेंट चढ़ गया। बुधवार को पूरे दिन लगातार हुई बारिश ने मेले की पूरी व्यवस्था की पोल खोल दी।जगह-जगह जलभराव और कीचड़ के कारण श्रद्धालुओं को खासी परेशानियों का सामना करना पड़ा।स्थानीय नागरिकों ने आरोप लगाया कि मेला शुरू होने से पहले ही तैयारियों के नाम पर खानापूर्ति की गई। नाले-नालियों की सफाई नहीं हुई, और न ही पक्के रास्तों की व्यवस्था की गई। श्रद्धालु फिसलते-गिरते, कीचड़ से लथपथ होकर पूजा-अर्चना के लिए मंदिर पहुंचे। कई स्थानों पर तो पानी भरा रहा, जिससे बुज़ुर्गों और महिलाओं को भारी मुश्किलों का सामना करना पड़ा।स्थानीय नागरिकों ने आरोप लगाया कि मेला शुरू होने से पहले ही तैयारियों के नाम पर खानापूर्ति की गई। नाले-नालियों की सफाई नहीं हुई, और न ही पक्के रास्तों की व्यवस्था की गई। सेहरामऊ उत्तरी क्षेत्र के माती माफ़ी में स्थित मां गूगा देवी का प्रसिद्ध मंदिर श्रद्धालुओं के लिए आस्था का केंद्र है। इस मंदिर पर प्रतिवर्ष इन्ही दिनों में जातों का मेला लगता है। आषाढ़ माह में प्रत्येक सप्ताह में सोमवार, बुधवार, शुक्रवार को बड़ी धूमधाम के साथ मेले का आयोजन होता है। बुधवार को मेले का अंतिम दिन था। अंतिम दिन भारी भीड़ जुटने की संभावना रहती है। लेकिन बुधवार सुबह से हुई मूसलाधार बारिश ने मेले की रंगत उड़ा दी। बारिश से मेले में होने वाली अव्यवस्थाओं की पोल खुल गई। बारिश से मेला परिसर में जलभराव और कीचड़ हो गया। जिससे मेला पहुंचे श्रद्धालुओं को समस्याओं का सामना करना पड़ा। कीचड़ से गुजर श्रद्धांलु मंदिर में पूजा अर्चना करने पहुंचे। वही इस मेले में कमेटी द्वारा प्रतिवर्ष दुकानदारों, झूला लगाने वालों से हजारों लाखों रूपये वसूले जाते है। लेकिन कमेटी द्वारा मेला परिसर में पहुंचने वाले श्रद्धालुओं के लिए कोई व्यवस्था नहीं की जाती। बारिश होने के बाद मेला में होने वाली अव्यवस्थाओं की पोल खुल गई। जिससे श्रद्धालुओं में नाराजगी देखने को मिली। लोगों आपस में चर्चा करते यह कहते हुए देखे गए कि आखिर मेलें से इक्क्ठा होने वाला पैसा कहां जाता है। सबसे बड़ी चिंता का विषय यह है कि मेला कमेटी हर साल मेले में दुकान लगाने वाले व्यापारियों व स्टॉल धारकों से मोटी रकम वसूलती है, लेकिन इन पैसों का उपयोग सुविधाएं जुटाने में नहीं किया जाता। स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं का आरोप है कि कमेटी केवल पैसा इकट्ठा करती है, लेकिन कोई भी ठोस व्यवस्था नहीं करती।श्रद्धालुओं ने मेला कमेटी की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि यदि पैसा लिया जा रहा है तो जवाबदेही भी तय होनी चाहिए। और मंदिर परिसर और मेला परिसर में व्यवस्थाएं भी करनी चाहिए। जिससे लोगों को असुविधा का सामना न करना पड़े। कुछ लोगों ने कहा कि यह मेला आस्था का प्रतीक है, लेकिन इसे केवल कमाई का जरिया बना दिया गया है।




